नालंदा: एंबुलेंस नहीं मिलने पर बेटे ने जख्मी पिता को ठेले पर लादकर पहुंचाया अस्पताल, लचर स्वास्थ्य व्यवस्था के कारण हुई मौत

नालंदा: बिहार में स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार के भले ही लाख दावे किए जाएं लेकिन कोई सुधार धरातल पर फिलहाल नहीं दिख रहा है. एक्सीडेंट के शिकार हुए जख्मी लोगों को एंबुलेंस तक नसीब नहीं हो रही है. मामला सोहसराय थाना क्षेत्र कटहल टोला का है. पिता को ठेले पर लादकर इधर से उधर भटकते हुए इस शख्स का वीडियो तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.

दरअसल सोहसराय थाना क्षेत्र कटहल टोला में नवनिर्मित मकान पर वाटर टैंक चढ़ाने के क्रम में मकान का छज्जा गिर गया, जिससे इस घटना में ठेला चालक समेत दो मजदूर जख्मी हो गए. घटना के संबंध में बताया जाता है कि कटहल टोला इलाके में ठेले में लोड करके नवनिर्मित मकान पर मजदूर टंकी चढ़ा रहा था. इसी दौरान टंकी छज्जा समेत मजदूरों पर गिर पड़ा और दोनों मजदूर घायल हो गए.

 दोनों जख्मी मजदूरों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया लेकिन वहां से चिकित्सकों ने एक जख्मी मजदूर फकीरचंद को गंभीर हालत में रेफर कर दिया. हालांकि परिजनों व वार्ड पार्षद के द्वारा इसकी सूचना स्थानीय सोहसराय थाने को भी दी गई, ताकि जख्मी की मदद की जा सके, लेकिन स्थानीय थाने की पुलिस ने कोई मदद नहीं की.

त्वरित मदद नहीं मिलने के कारण जख्मी फकीरचंद के बेटे रंजन ने अपने पिता को ठेले पर लाद लिया और अस्पताल के लिए निकल पड़ा. करीब 2 किलोमीटर ठेला चलाकर रंजन सदर अस्पताल पहुंचा. हालांकि तब तक बहुत देर हो चुकी थी. लचर व्यवस्था के कारण एक और व्यक्ति की मौत हो गई. हालांकि सदर अस्पताल के द्वारा जख्मी को अस्पताल से कुछ दूरी पर सरकारी एंबुलेंस मुहैया कराया गया था ताकि मामले को लेकर सवाल ना उठाया जाए.

वहीं इस मामले को लेकर सिविल सर्जन अविनाश कुमार सिंह का आधा अधूरा ज्ञान भी देखने को मिला. उन्होंने कहा कि अगर किसी प्रकार की भी इलाके में घटना घटती है तो घायल व्यक्ति को अस्पताल तक लाने के लिए 102 पर डायल करना चाहिए. जबकि बिहार में अब इमरजेंसी रिस्पांस सपोर्ट सिस्टम का नंबर बदल चुका है. सभी तरह की इमरजेंसी के लिए अब 112 डायल करना है. सीएम नीतीश कुमार ने खुद 6 जून को इसे हरी झंडी दिखाकर इसका शुभारंभ किया था.

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