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चारा घोटाला मामले में लालू यादव को मिली पांच साल की सजा और 60 लाख का जुर्माना

पटनाः राष्ट्रीय जनता दल के सुप्रीमो और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव समेत 38 दोषियों को वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए आज सजा सुनाई गई. डोरंडा चारा घोटाला केस में रांची की सीबीआई की विशेष अदालत ने यह सजा सुनाई है. इस मामले में लालू प्रसाद यादव को पांच साल की जेल और 60 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है. लालू यादव के अलावा चारा घोटाला के इस बड़े मामले में 37 अन्‍य दोष‍ियों को भी सजा सुनाई गई है.

सीबीआई के जज एसके शशि ने इन दोषियों को सजा सुनाई. लालू प्रसाद यादव इस समय रांची र‍िम्‍स में इलाजरत हैं. होटवार जेल प्रशासन की ओर से उन्‍हें एक लैपटॉप उपलब्‍ध कराया गया था. इसी के सहारे उन्होंने अपनी सजा सुनी. सजा के ऐलान से पहले लालू प्रसाद यादव के वकील प्रभात कुमार ने कहा था कि कोर्ट में लालू यादव के स्वास्थ्य और बीमारी को देखते हुए कम से कम सजा देने की अपील की गई थी.

लालू के वकील ने बताया कि आगे बेल के लिए अर्जी दी जाएगी. लेकिन बेल नहीं मिलने तक लालू को जेल में ही रहना पड़ेगा.

डोरंडा कोषागार का मामला चारा घोटाले का सबसे बड़ा मामला था. चारा घोटाले में लालू यादव को मुख्य साजिशकर्ता बताया गया था. सीबीआई की तरफ से कहा गया था कि लालू यादव जब वित्त मंत्री, मुख्यमंत्री थे तो उनकी नाक के नीचे यह सब कुछ हुआ, यानी यह सब उनकी जानकारी में था.

बता दें कि लालू को पहले भी चारा घोटाले से जुड़े चार मामलों में दोषी ठहराया जा चुका है. इनमें फिलहाल लालू बेल पर चल रहे हैं. इनमें भी उनको हाईकोर्ट से जमानत मिली थी. लोअर कोर्ट या ट्रायल कोर्ट ने उनको इसमें राहत नहीं दी थी. बाद में हाईकोर्ट में कुछ सजा काटने और हेल्थ इशू की दलील दी गई, जिसपर हाईकोर्ट ने उनको जमानत दी.

सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने 15 फरवरी को लालू यादव समेत अन्य आरोपियों को को 139.5 करोड़ रुपये के डोरंडा कोषागार से जुड़े चारा घोटाले में दोषी पाया था. कोर्ट ने तब सजा का ऐलान नहीं किया था. 

बता दें कि राष्ट्रीय जनता दल (RJD) सुप्रीमो लालू यादव को चारा घोटाले से जुड़े अन्य चार मामलों (दुमका, देवघर और चाईबासा) में पहले ही दोषी ठहराया जा चुका है. इसमें उनको कुल 14 साल की सजा हुई है. वहीं जुर्माने के तौर पर उनको अबतक 60 लाख रुपये देने पड़े थे.

चाईबासा से जो पहला मामला (37 करोड़ की अवैध निकासी) था उसमें लालू को पांच साल की सजा हुई थी. देवघर कोषागार से (79 लाख की निकासी) में लालू को 3.5 साल की सजा हुई थी. फिर चाईबासा के दूसरे मामले (33.13 लाख की अवैध निकासी) में उन्हें पांच साल की सजा हुई थी. फिर दुमका कोषागार (3.13 करोड़ की निकासी) के मामले में सात साल की सजा लालू को सुनाई गई थी.

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