नालंदा: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने किया राजगीर जू सफारी का उद्घाटन, जानें क्या है सफारी में खास

नालंदा : बिहार को पर्यटन के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक बार फिर बिहार वासियों को बड़ी सौगात दी है. राजगीर की वादियों में 177 करोड़ की लागत से निर्मित जू-सफारी का उद्घाटन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने किया. मौके पर कई मंत्री और अधिकारी मौजूद रहे. इस जू-सफारी में घूमने के लिए ऑनलाइन टिकट की भी शुरुआत होगी.

इस जू-सफारी के अंदर दर्शक शेर, बाघ एवं अन्य वन्य प्राणियों को खुले वातावरण में घूमते हुए बंद गाड़ियों में बैठकर देख सकेंगे. इस जू सफारी में बंगाल और गुजरात जू से शेर और बाघ भी मंगाए गए हैं. जू-सफारी पार्क को स्वर्ण गिरी पर्वत एवं वैभव गिरी पर्वत के बीच घाटी वाले हिस्से में विकसित किया गया है. साथ ही साथ डू-सफारी में विचरण कर रहे जानवरों को दूर से देखने के लिए वैभव गिरी पर्वत पर माइक्रो टेलीस्कोप लगाए जाएंगे.

 वहीं, प्रवेश द्वार पर टिकट काउंटर और ऑडिटोरियम के अलावा बस पड़ाव व प्रतीक्षालय और रेस्टोरेंट की भी सुविधा है. राजगीर आने वाले सैलानी अब रोपवे स्काई वॉक, ग्लास ब्रिज, नेचर सफारी के बाद जू सफारी का भी लुत्फ उठा सकेंगे. इसके उद्धाटन के लिए सैलानी काफी दिनों से इंतजार कर रहे थे. जू सफारी के उद्घाटन के साथ ही बिहार में इको टूरिज्म के नए युग की शुरुआत हो गयी. मुख्यमंत्री पहले भी जू सफारी का निरीक्षण कर चुके हैं. 191 हेक्टेयर में जू सफारी तैयार किया गया है. वैसे तो पिछले साल ही जू सफारी का उद्घाटन होना था लेकिन कई कारणों से विलंब हुआ है.

 जू सफारी पार्क के निर्माण में करीब 177 करोड़ रुपये खर्च हुए. इसमें वन्य जन्तुओं को सामान्य चिड़ियाघर की तुलना मे खुले वनों का घेरान कर काफी बड़े-बड़े बाड़ों में रख कर उन्हें स्वच्छंद विचरण की सुविधा दी गई. जिसे पर्यटक प्रत्यक्ष देख सकेंगे. पर्यटक बंद मजबूत संरक्षित वाहन के माध्यम से बाड़ों के अंदर जाकर वन्यजन्तुओं को प्राकृतिक पारिस्थितिकी प्रणाली में निहित गतिविधियों को ज्यादा करीब से आनंद उठा सकेंगे. यहां विश्व की विभिन्न प्रजातियों के पंक्षियों व तितलियों को उनके अपने प्राकृतिक अधिवास में रखा गया है. सफारी में राजगीर की पांच पहाड़ियों के बीच वनों, वनस्पतियों व वन्यजन्तुओं की विविधता का संगम है. यहां रहने वाले जानवरों के इलाज की भी सुविधा है. सड़क का भी निर्माण कार्य बिल्कुल प्राकृतिक रूप से किया गया है.

राजगीर वन्य प्राणी स्वर्ण गिरी पर्वत एवं व्यवहार गिरी पर्वत के बीच की घाटी वाले हिस्से में 191.12 हेक्टेयर क्षेत्रफल मे विकसित किया गया है. इसमें 72 हेक्टेयर क्षेत्रफल का पुराना मृग विहार भी समाहित है. इसमें निम्न वन्यजन्तुओं के लिए घेरे वाले पांच जोन में होंगे जिसमें बाघ, शेर, तेन्दुआ, भालू, हिरण को रखा गया है. इस सफारी पार्क का डिजाइन छत्तीसगढ़ के कंपनी एलएनसी द्वारा किया गया है.

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