जनसंख्या नियंत्रण नीति पर नीतीश कुमार और रेणु देवी आमने-सामने, कहा- पुरुषों को जागरूक करना जरूरी

पटना: जनसंख्या नियंत्रण और समान नागरिक संहिता पर प्रस्तावित विधेयक देश में राजनीतिक विमर्श का पुराना मुद्दा रहा है और यह भाजपा के वैचारिक एजेंडे का हिस्सा भी रहा है. वहीं एक बार फिर जनसंख्या नियंत्रण को लेकर देश में बहस छिड़ी है. भाजपा नेता जनसंख्या नियंत्रण के लिए कानून बनाने की पुरजोर वकालत कर रहे हैं. वहीं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का अलग स्टैंड है. मुख्यमंत्री के राय से उप मुख्यमंत्री रेणु देवी सहमत नहीं दिखाई दे रही हैं.

बता दें कि बिहार के पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश में बीते 11 जुलाई को जनसंख्या नीति पेश की गई है. योगी सरकार के माध्यम से लायी गई इस नीति के बाद देश भर में राजनीतिक गलियारें में हलचल तेज हो गई है. इस नीति को लेकर सभी अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं. इसी कड़ी में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उप मुख्यमंत्री ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है.

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा है कि जनसंख्या नियंत्रण के लिए कानून बनाने से ज्यादा जरूरत महिलाओं को जागरूक करना है. महिलाएं अगर शिक्षित और जागरूक हो जाएंगी, तो जनसंख्या नियंत्रण आसानी से हो जाएगा. लेकिन दूसरी ओर मुख्यमंत्री के राय से बिहार की डिप्टी सीएम रेनू देवी सहमत नहीं है. रेणु देवी का कहना है कि जनसंख्या नियंत्रण के लिए पुरुषों को जागरूक करना ज्यादा जरूरी है. महिलाओं से ज्यादा पुरुषों में जागरूकता लाने की जरूरत है. क्योंकि पुरुषों में नसबंदी को लेकर काफी डर देखा जाता है. बिहार के कई जिलों में तो नसबंदी की दर मात्र 1% ही है.

 रेणु देवी ने कहा कि महिलाओं के रिप्रोडक्टिव हेल्‍थ के लिए सरकारी अस्‍पतालों में कई सुविधाएं दी जाती हैं. मगर इन सुविधाओं को लाभ महिलाओं तक तभी पहुंचेगा जब घर के पुरुष जागरूक हाें और महिलाओं को अस्‍पताल तक लेकर जाएं.

उपमुख्यमंत्री ने कहा, ” अक्‍सर देखा गया है कि बेटे की चाहत में प‍ति और ससुराल वाले महिला पर अधिक बच्‍चे पैदा करने का दबाव बनाते हैं, जिससे परिवार का आकार बड़ा होता जाता है. जनसंख्‍या नियंत्रण के लिए जेंडर इक्वलिटी पर भी काम करने की जरूरत है. लोगों को समझना होगा कि बेटा-बेटी एक समान हैं. 

उन्होंने कहा कि बिहार के देश के सर्वाधिक आबादी वाले राज्यों में से एक है. बिहार में अब भी प्रजनन दर 3.0 है. राज्य में खुशहाली के लिए जनसंख्या स्थिर होना बेहद जरूरी है. विशेषज्ञों की भी राय है कि बढ़ती या अनियंत्रित आबादी राज्य की चहुमुखी विकास में बाधक होती है. 

रेणु देवी ने कहा कि बिहार में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के शिविरों में जनसंख्या नियंत्रण को लेकर कई कदम उठाए गए हैं. शिविरों में गर्भनिरोधक गोलियों का वितरण, परिवार नियोजन के उपायों की जानकारी और सुरक्षित प्रसव को लेकर लोगों को जागरूक किया जा रहा है. जिससे बढ़ती जनसंख्या पर रोक लगाई जा सके.

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