लालू के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव की तबीयत बिगड़ी, भाई से मिलने पहुंचे तेजस्वी

पटना: राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के सुप्रीमो लालू यादव के बड़े बेटे और हसनपुर से विधायक तेज प्रताप यादव की मंगलवार की देर शाम अचानक तबीयत बिगड़ गई है. तेज बुखार और सांस लेने में तकलीफ की शिकायत के बाद डॉक्टरों की टीम उनके सरकारी आवास पहुंची. आवास पर ही उनका इलाज चल रहा है. इधर, बड़े भाई की तबीयत खराब होने की सूचना मिलते ही नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव उनके आवास पहुंचे. फिलहाल, हसनपुर विधायक की तबीयत स्थिर बताई जा रही है. मालूम हो कि हाल ही में दोनों भाई ने कोरोना वैक्सीन ली है.

मौके पर पहुंचे डॉक्टर का कहना है कि तेज प्रताप ने कोरोना की वैक्सीन ली है, जिसके चलते उन्हें सामान्य लक्षण हैं. उन्होंने बताया कि तेज प्रताप को बुखार और बदन दर्द की शिकायत है. जोकि जल्द ही ठीक हो जाएगी. 

जानकारी के मुताबिक 30 जून को तेजस्वी और उनके भाई तेजप्रताप ने पटना के मेदांता अस्पताल में स्पूतनिक वैक्सीन की पहली डोज ले ली है. वैक्सीन लेने के बाद तेजस्वी यादव ने कहा कि कुछ लोग मेरे वैक्सीन न लेने पर सवाल खड़ा कर रहे थे, जिनको बोलना है वो तो बोलते रहेंगे. लेकिन मैंने ये तो नहीं कहा था कि वैक्सीन नहीं लूंगा, मैंने कहा था कि समय आने पर ले लूंगा. 

तेजस्वी ने कहा कि हम तो लगातार लोगों से वैक्सीन लेने की अपील कर रहे हैं और हमारे नेताओं ने भी वैक्सीन ली है. वैक्सीन के अलावा कोरोना का कोई दूसरा इलाज नहीं है. हमको तो जनता के बीच रहना है इसलिए वैक्सीन ले ली नहीं तो कल को कहेंगे कि हम कोरोना फैला रहे हैं. 

ध्यान देने वाली बात है कि राष्ट्रीय जनता दल ने सोमवार को अपना 25वां स्थापना दिवस मनाया. बिहार की राजधानी पटना स्थित पार्टी कार्यालय में कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम का लालू यादव ने उद्घाटन किया, जिसके बाद एक-एक कर पार्टी नेताओं कार्यक्रम को संबोधित किया. इसी क्रम में तेज प्रताप यादव भी लोगों को संबोधित करने मंच पर आए थे. इस दौरान उन्होंने जमकर अपनी भड़ास निकाली थी. वहीं, मंच पर बैठे तेजस्वी यादव और जगदानंद सिंह पर तंज भी कसा था. 

तेज प्रताप यादव ने कहा था, ” संगठन समुद्र होता है , इसमें बहुत सारे लोग आते और जाते हैं. कुछ लोग रूठते हैं, जिन्हें मनाना भी पड़ता है. इसलिए संगठन में सबको एक साथ मिलकर चलना है और जो जिम्मेदारी पार्टी की ओर से दी गई है, उसे पूरा करना है.”

उन्होंने कहा था, ” हम जब बोलते हैं, तो कुछ लोग हंसते हैं, मजाक उड़ाते हैं. लेकिन कौन ‘भौंक’ रहा उसपर हम ध्यान नहीं देते हैं. मेरा कांसेप्ट क्लियर है. मैं किसी से नहीं डरता. सब कुछ मुंह पर बोलता हूं. केवल भगवान से डरता हूं. पिता जी भी जब बोलते थे, तो विरोधी हंसते थे. मजाक बनाते थे कि गांव को में जानवरों को चराने वाला नेता बना हुआ है. बहुत सारे लोग निशाना साधते थे. लेकिन वो जब भी मंच पर आते थे, तो लोगों का मनोरंजन करने का काम करते थे. मनोरंजन भी होता था और काम भी.”

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