नालंदा: सर्पदंश से महिला की हुई मौत, फिर से जिंदा करने के लिए घंटो चला झाड़फूंक का तमाशा

 नालंदा जिले के भागनबीघा थाना के पचासा गांव में अंधविश्‍वास का आलम यह है कि सर्पदंश से मृत एक महिला के शव के साथ तमाशा होता रहा। तंत्र-मंत्र से उसे जिंदा करने का खेल चलता रहा. लोग तमाशबीन बने रहे. आखिरकार वही हुआ, जो होना था. महिला के शव को स्‍वजन अंत्‍येष्टि के लि ले गए. 

दरअसल, गांव की मुल्की देवी शुक्रवार की सुबह करीब पांच बजे अपने घर में काम कर रही थी. इसी दौरान घर के अंदर छिपे सांप ने उसे डस लिया. स्वजन महिला को तत्काल इलाज के लिए गांव से पांच किमी दूर बिहारशरीफ सदर अस्पताल ले गए. वहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया.

इसके बाद भी स्वजन को भरोसा नहीं हुआ. वे शव लेकर घर लौट गए. घर में चीख-पुकार मच गई. इसके बाद झाड़फूंक करने वाले एक ओझा को बुला लाए. वह ओझा करीब एक घंटे तक तमाशा करता  फिर करीब एक घण्टे तक जड़ी-बूटी और तंत्र-मंत्र के जरिए महिला को जिंदा करने की कोशिश की गई. इस दौरान गांव के सैकड़ों लोग तमाशबीन बने रहे. सभी को कुछ चमत्कार होने की आस थी. कोई ओझा की पीठ पर थाली व ईंट चिपकने को जहर खींचने का जरिया बताता रहा तो कोई झाड़-फूंक के दौरान महिला के शरीर का रंग बदलने की बात कहते सुने गए. ओझा के पीठ पर पीतल की थाली और ईंट चिपकी हुई थी.

अंततः लोगों ने स्वीकार कर लिया कि महिला की मौत हो गई है. फिर भी कुछ अंधविश्वासी महिलाएं यह कहती सुनी गईं की ई उपयवा पहिले होवे के चाह अ हलो. हालांकि एक ग्रामीण अनिल पासवान ने कहा कि लोगों को अंधविश्वास के चक्कर में नहीं पड़ना चाहिए. यह पैसा और वक्त दोनों की बर्बादी है. सर्पदंश होने पर सीधे हॉस्पीटल जाना चाहिए और डॉक्टर के इलाज पर ही भरोसा करना चाहिए.

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