हिमाचल सरकार का बड़ा फैसला: कोरोना की वजह से अनाथ हुए बच्चों को हर माह मिलेंगे 3500 रुपये

कोरोना के इस काल ने इंसान का कई परिस्थितियों से उसका वास्तविक परिचय करवाया है. आलम ये है कि आज कोरोना की बदौलत जहां सैकड़ों लोगों का रोजगार छिन गया है तो सैकड़ों ऐसे परिवार हैं जिनके सिर से दो जून की रोटी का जुगाड़ करने वालों का ही साया उठ गया है. कई बच्चों के सर से उनके मां-बाप तक का साया उठ गया है. ऐसे में हिमाचल की सरकार ने अनाथ बच्चों के लालन-पालन और उनकी शिक्षा-दीक्षा के लिये बीड़ा उठाया है. केंद्र और राज्य सरकार मिलकर अनाथ हुए बच्चों को 35 सौ रुपये हर महीने देगी.

प्रदेश की सामाजिक न्याय एवं महिला बाल विकास मंत्री सरवीण चौधरी ने कहा कि प्रदेश सरकार ऐसे बच्चों का डाटा एकत्रित करेगी, जो इस महामारी के दौरान अपने अज़ीज परिजनों मां-बाप को ही खो चुके हैं. यानी पूरी तरह से अनाथ हो गए हैं, उन्होंने बताया कि प्रदेश और केंद्र की सरकार नव ऐसे बच्चों को उनका सामाजिक हक दिलाने का बीड़ा उठाया है, ताकि वो अपनों के भवनात्मक भाव के अभाव में फिसड्डी न हो जाएं और ख़ुद को हीन भावना का शिकार न बना लें.

सरवीण चौधरी नव कहा कि सरकार ऐसे बच्चों के लिये 35 सौ रुपये प्रति माह देने का फ़ैसला लिया है, जिसमें से 2 हज़ार रुपये केंद्र की ओर से PM राहत केयर के जरिए और 15 सौ हिमाचल सरकार के जरिये देने का प्रावधान रखा गया है.

इतना ही नहीं इन बच्चों को गुणवत्ता पूरक शिक्षा मुहैया करवाने के लिये जवाहर नवोदय विद्यालय और बेटियों के लिये कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में दाखिला दिलवायेंगे, ताकि वो भी अपने भविष्य को शिक्षा के इन मंदिरों की मार्फ़त उज्ज्वल बना सकें. उन्होंने कहा कि इस महामारी के दौरान किसी भी प्रकार का शिकार हुये लोगों को उनका हक दिलाने के लिये सरकार वचनबद्ध है.

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