नवादा में ब्लैक फंगस ने दी दस्तक, महिला में दिखे लक्षण, पटना एम्स रेफर

कोरोना महामारी के साथ ब्लैक फंगस ने नवादा में दस्तक दे दी हैं, इसके साथ ही स्वास्थ्य विभाग की चुनौतियां बढ़ गयी हैं. नवादा में ब्लैक फंगस का पहला मामला सामने आया है. सदर अस्पताल में इलाज को पहुंची एक महिला में ब्लैक फंगस के लक्षण पाए गये हैं. जिसके बाद उसे एम्स पटना के लिए रेफर कर दिया गया है.

सूत्रों से यह बात निकल कर आयी है कि हाल ही में स्वास्थ्य विभाग की एक महिला स्वास्थ्यकर्मी की मां कोरोना संक्रमित हुई थी. इलाज के बाद वह स्वस्थ हुई, उसके कुछ ही दिन में उसे फिर से तकलीफ हुई. तब उन्हें सदर अस्पताल लाया गया, जहां बीमारी के विभिन्न लक्षणों के आधार पर ब्लैक फंगस होने की आशंका जतायी गई और महिला को पटना स्थित हायर हेल्थ सेंटर को रेफर कर दिया गया है.

बता दें कि ब्लैक फंगस से राज्य में मौतें होनी शुरू हो गयी है. बिहार सरकार ने भी इस बीमारी को महामारी घोषित कर दिया है. अब नवादा में भी इसने दस्तक दे दी है.

बता दे कि ब्लैक फंगस एक दुर्लभ संक्रमण का वाहक है, जिसे म्यूकरमाईकोसिस भी कहा जाता है.हाल के दिनों में यह कोविड-19 मरीज या स्वस्थ हो चुके कोविड-19 मरीजों के लिए खतरनाक साबित हो रहा है. यदि समय पर ध्यान नहीं दिया जाए, तो यह 50 से 80 फीसदी मरीजों के लिए मौत का कारण बन जाता है. यह फंगल इंफेक्शन खास तौर पर वैसे लोगों को संक्रमित करता है, जो किसी न किसी बीमारी की वजह से दवाओं का सेवन कर रहे हैं. ऐसे लोगों में बीमारियों से लड़ने की क्षमता कम हो जाती है. जिससे हवा के जरिए नाक के साइनस व फेफड़ों में संक्रमण फैल जाता है. कई मामलों में यह दिमाग में भी फैल जाता है. आंखों के जरिए इसका संक्रमण होता है और धीरे-धीरे दिमाग के कई हिस्सों में प्रवेश कर जाता है, जिसके बाद मरीज की मौत हो जाती है.

आम तौर पर ब्लैक फंगस कोरोना संक्रमित को अपना शिकार बना रहा है. बता दें कि कोरोना संक्रमण के इलाज में स्टेरॉयड का अंधाधुध इस्तेमाल हो रहा है. कई मामलों में मरीजों को ऑक्सीजन की गंदी सप्लाई भी ब्लैक फंगस को न्यौता देती है. जिन लोगों की डायबिटीज बढ़ी होती है, स्टेरॉयड से उनमें इम्यूनोसप्रेशन हो जाता है. ऐसे मरीज जो लंबे समय तक मेडिकल ऑक्सीजन का प्रयोग कर रहे हैं, उन्हें भी खास सावधानी बरतने की आवश्यकता है. मेडिकल ऑक्सीजन को मरीजों को देने के पहले ह्यूमिडिफिकेशन किया जाता है. इसके लिए कंटेनर में स्टेरलाईज्ड वाटर भरा जाता है और प्रोटोकॉल के तहत उसे बार-बार बदला भी जाता है। कंटेनर का पानी स्टेरलाईज्ड नहीं करने पर ब्लैक फंगस की संभावना बढ़ जाती है.


बता दें कि ब्लैक फंगस हमारे घर में ही पनपता है. गिली मिट्टी में म्यूकर के सम्पर्क में आने के बाद यह तेजी से बढ़ता है. आमतौर पर यह मिट्टी, जानवर की गोबर, सड़ी लकड़ी, पौधों की सामग्री, खाद्य और सड़े फलों और सब्जियों में पनपता है. घर के फ्रिज में रखा फल या सब्जी सड़ रहा हो, तो उनमें फफूंदी लग जाती है. उसे समय रहते हटा देना चाहिए.

कोरोना की दूसरी लहर के दौरान बड़ी संख्या में मरीज मिले हैं. अस्पतालों में उनका इलाज चला। कई मामलों में गंदे तरीके से ऑक्सीजन सप्लाई हुई, जिससे ब्लैक फंगस का मामले सामने आया हैं. इसके अलावा कोरोना मरीजों के इलाज में स्टेरॉयड का अधिक इस्तेमाल भी ब्लैक फंगस को बढ़ावा दे रहा है.

You might also like

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Accept Read More