बिहार में ब्‍लैक फंगस महामारी घोषित, स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे ने दी जानकारी

पटना: कोरोना महामारी के दौर में ब्लैक फंगस का खतरा भी तेजी से बढ़ रहा है. जिसके चलते बिहार सरकार ने ब्लैक फंगस को महामारी घोषित कर दिया है. बिहार में इस बीमारी से कई लोग ग्रसित हो चुके हैं और रोज इसके मामले सामने आ रहे हैं. ब्लैक फंगस को लेकर कहा जा रहा है कि ये शरीर के बाहरी हिस्से से होकर अंदर प्रवेश कर आंख या मस्तिक में पहुंचकर टिशू को बुरी तरह से डैमेज कर देता है.

कोरोना वायरस की दूसरी लहर कहर मजा रही है वहीं ये तबाही अभी थमी भी नहीं थी कि अब एक और नई मुसीबत ने बिहार में दस्तक दे दी है. कोरोना महामारी के बाद अब राज्य में ‘ब्लैक फंगस’ बीमारी के भी मरीज मिलने शुरू हो गए हैं. जो प्रदेश में महामारी का रूप ले रही है.

बिहार सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए ब्लैक फंगस को आपदा की श्रेणी में रखा है. ब्लैक फंगस के मरीजों के बेहतर इलाज के लिए राज्य सरकार ने यह फैसला लिया है.

बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने कहा है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के निर्देश पर ब्लैक फंगस को ऐपिडमिक डिजिज एक्ट के तहत अधिसूचित किया गया है. मंगल पांडेय ने कहा कि इसके तहत स्वास्थ्य विभाग द्वारा कई निर्देश जारी किए गए हैं. इस एक्ट के तहत सभी निजी एवं सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों द्वारा म्यूकोरमायकोसिस के सभी संदिग्ध एवं प्रमाणित मरीजों के मामले को सिविल सर्जन के माध्यम ये एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम, स्वास्थ्य विभाग को प्रतिवेदित किया जाएगा.

सरकार के निर्देश के मुताबिक, सभी अस्पतालों को ब्लैक फंगस के मरीजी के इलाज के लिए राज्य सरकार और केंद्र सरकार के गाइ लाइन को फॉलो करना होगा. मरीजों के इलाज के लिए RMRI में दवाई का भंडारण किया गया है. पटना में एम्स , IGIMS , PMCH , NMCH में मरीजों के इलाज की विशेष व्यवस्था की गई है. मरीजों को एंफोटेरिसिन की दवा मुफ्त में मिलेगी.

बता दें कि ब्लैक फंगस को लेकर बहुत घबराने की जरूरत नहीं है. समय पर इलाज व ऑपरेशन से मरीज की जान काफी हद तक बचायी जा सकती है. इलाज में देरी ही मरीज के जीवन के लिए खतरा बन सकता है. दरअसल अनकंट्रोल डायबिटीज, स्टेरॉयड लेने के कारण इम्यूनो सप्रेशन, कोरोना संक्रमण अधिक होने के कारण अधिक समय आइसीयू में रहना, जैसे कई कारणों से ब्लैक फंगस का खतरा बढ़ जाता है.

ऐसे लक्षणों से ब्लैक फंगस की जा सकती है पहचान

नाक जाम होना, नाक से काला या लाल स्राव निकलना, गाल की हड्डी में दर्द होना, चेहरे पर एक तरफ दर्द होना या सूजन, दांत या जबड़े में दर्द, दांत टूटना, धुंधला या दोहरा दिखाई देना और सीने में दर्द और सांस में परेशानी जैसे लक्षणों से इसकी पहचान की जा सकती है.

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