बिहार के पूर्व शिक्षा मंत्री और JDU MLA मेवालाल चौधरी का कोरोना से निधन

मुंगेर/पटना: तारापुर विधानसभा क्षेत्र के विधायक एवं पूर्व शिक्षा मंत्री मेवालाल चौधरी का निधन हो गया. वे कोरोना से पीड़ित थे.कोरोना संक्रमित होने के बाद उन्हें पारस हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था. सोमवार की सुबह करीब 4:30 में उन्होंने अंतिम सांस ली. 4 दिन पहले वे कोरोना पॉजिटिव हुए थे. 

4 दिन पूर्व ही उन्हें छाती में तेज दर्द की शिकायत पर मुंगेर सिटी क्रिटिकल हॉस्पिटल लाया गया था. जहां डॉक्टरों ने बेहतर इलाज के लिए पटना जाने की सलाह दी थी. डॉक्टरों की सलाह पर पारस अस्पताल में इलाज के लिए वे भर्ती थे. सोमवार के 4:30 बजे वे कोरोना से जंग हार गए. उनका निधन हो गया.

 मेवालाल चौधरी के निधन की खबर मिलते ही सुबह-सुबह पटना के सियासी गलियारों में शोक की लहर दौड़ गई. विधानसभा अध्यक्ष विजय सिन्हा ने अपने शोक संदेश में कहा कि उनके निधन से मुझे व्यक्तिगत क्षति हुई है. मैं इस सूचना से स्तब्ध और मर्माहत हूं. वह एक नेक इंसान, शिक्षाविद और कुशल समाजसेवी थे. ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करे और शोक संतप्त परिवार को दारूण दुख सहने की शक्ति प्रदान करें.

इसके अलावा बिहार सरकार के पंचायती राज मंत्री सम्राट चौधरी ने भी मेवालाल चौधरी के निधन पर गहरा दुख जताया है. वहीं, सत्ता पक्ष के साथ-साथ आरजेडी के नेताओं ने भी इस घटना पर शोक व्यक्त किया.

डॉ.मेवालाल चौधरी तारापुर प्रखंड के कमरगांव गांव के निवासी थे. राजनीति में आने से पहले वर्ष 2015 तक वे भागलपुर कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति थे. वर्ष 2015 में सेवानिवृत्ति के बाद राजनीति में आए.

मेवालाल चौधरी को राजनीति विरासत में मिली थी. उनकी पत्नी स्वर्गीय नीता चौधरी 2010 से 2015 तक तारापुर से विधायक रही थीं. वह राजनीति में काफी सक्रिय थीं. मेवालाल चौधरी सबौर कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति भी रह चुके थे. जब वे कृषि विश्वविद्यालय से रिटायर हुए तो उनकी पत्नी ने यह सीट उनके लिए छोड़ दी. जदयू ने पत्नी की जगह मेवालाल को टिकट दिया. मेवालाल भारी मतों से जीते भी थे.

दूसरी बार 2020 में मेवालाल चौधरी विधायक बने. नई सरकार में उन्हें शिक्षा मंत्री का पद दिया था. लेकिन कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति रहते हुए सहायक प्रोफेसर भर्ती घोटाले का अभियुक्त होने के कारण विपक्ष ने यह मुद्दा जोर-शोर से उठाया. इस पर मेवालाल चौधरी को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा. बता दें कि उन्होंने 19 नवंबर को पदभार ग्रहण किया था. विपक्ष के हंगामे के बाद उन्हें तीन घंटे के बाद ही स्तीफा देना पड़ा था. उन्होंने पदभार ग्रहण करने के 71 घंटे पहले शपथ ली थी.

सबौर कृषि विश्वविद्यालय में सहायक अध्यापक सह जूनियर वैज्ञानिक की भर्ती के दौरान जमकर धांधली हुई थी. इस मामले में तत्कालीन कुलपति और मौजूदा शिक्षा मंत्री डॉ. मेवालाल चौधरी पर धांधली का आरोप लगा था. वहीं इस मामले में सबौर थाना में डॉ. मेवालाल चौधरी पर प्राथमिकी भी दर्ज करवायी गयी थी. हालांकि फिलहाल वे हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत पर थे. 2019 में रसोई गैस सिलेंडर में आग लगने से हुई उनकी पत्नी की मौत के पीछे सीबीआई जांच की मांग उठी थी.

2017 में मेवालाल चौधरी पर भागलपुर के सबौर कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति रहते हुए नौकरी में भारी घपलेबाजी करने का आरोप था. उनके ऊपर कुलपति रहते हुए उन्होंने 161 असिस्टेंट प्रोफेसर की गलत तरीके से बहाली करने का आरोप था. बकायदा तत्कालीन बिहार के राज्यपाल रामनाथ कोविंद ने उस वक्त मेवालाल चौधरी के खिलाफ जांच के आदेश दिए थे. जांच में मेवालाल चौधरी के खिलाफ लगे आरोपों को सही पाया गया था. इसके अलावा उन पर सबौर कृषि विश्वविद्यालय के भवन निर्माण में भी घपलेबाजी का आरोप था.

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