बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, इंडियन ओवरसीज बैंक और सेंट्रल बैंक जल्द होंगे प्राइवेट, 6 महीने में प्रोसेस होगा शुरू

केंद्र सरकार जल्द ही 4 और बैंकों का निजीकरण कर सकती है.सरकार ने निजीकरण के लिए प्रारंभिक रूप से चार मध्यम-आकार के बैंकों का चयन किया है. सरकार के तीन सूत्रों ने इसकी जानकारी दी है. सूत्रों के मुताबिक इनमें बैंक ऑफ महाराष्ट्र (बीओएम), बैंक ऑफ इंडिया (बीओआइ), इंडियन ओवरसीज बैंक (आइओबी) व सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया शामिल हैं.

आपको बता दें वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज अपने केंद्रीय बजट 2021 के भाषण में भी घोषणा की थी कि सार्वजनिक क्षेत्र के दो बैंकों और एक सामान्य बीमा कंपनी का निजीकरण किया जाएगा क्योंकि इस समय केंद्र सरकार विनिवेश पर अधिक ध्यान दे रही है. इसके साथ ही भारत पेट्रोलियम में विनिवेश की योजना बनाई जा रही है.

मोटे तौर पर बड़े सरकारी बैंकों के प्रभुत्व वाले भारतीय बैंकिंग सेक्टर में निजीकरण जैसा कोई भी फैसला राजनीतिक रूप से जोखिमभरा हो सकता है. इसकी वजह यह है कि इनके कर्मचारियों की तादाद बहुत अधिक है. निजीकरण की सूरत में इनमें से अधिकांश के बेरोजगार हो जाने का जोखिम बना रहता है. इसे देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रशासन ने निजीकरण की शुरुआत दूसरी श्रेणी के बैंकों से करने का फैसला किया है. सरकार ने जिन चार बैंकों का चयन किया है, उनमें से दो की बिक्री अप्रैल से शुरू हो रहे वित्त वर्ष में की जाएगी.

अधिकारियों का कहना था कि बैंकों के निजीकरण को लेकर बाजार और निवेशकों का मूड भांपने के लिए निजीकरण के पहले दौर में मझोले व छोटे बैंकों का चयन कर रही है. अगर निवेशकों की प्रतिक्रिया ठीक रही, तो आने वाले समय में सरकार अपेक्षाकृत कुछ बड़े बैंकों के निजीकरण पर भी विचार कर सकती है. वर्तमान में बीओआइ की कर्मचारी संख्या करीब 50,000 और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की 33,000 है. आइओबी में इस वक्त करीब 26,000 कर्मचारी हैं. इस मामले में बीओएम 13,000 कर्मचारियों के साथ सबसे छोटा है, लिहाजा उसके निजीकरण में ज्यादा दिक्कत आने की संभावना नहीं है. सूत्रों का कहना है कि निजीकरण की प्रक्रिया में छह महीने तक लग सकते हैं.

आपको बता दें कि इस समय केंद्र सरकार देश के सरकारी बैंकों में से आधे से ज्‍यादा का निजीकरण करने की योजना बना रही है. अगर सबकुछ योजना के मुताबिक हुआ तो आने वाले समय में देश में सिर्फ 5 सरकारी बैंक रह जाएंगे.

बैंकिंग सेक्टर में बीते तीन वर्षों में विलय और निजीकरण के चलते सरकारी बैंकों की संख्या 27 से 12 ही रह गई है, जिसे केंद्र सरकार अब 5 तक ही सीमित करने की तैयारी में है. इसके लिए नीति आयोग ने ब्लूप्रिंट भी तैयार कर लिया है.

You might also like

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Accept Read More