Uttarakhand Chamoli Disaster: केंद्र ने सभी मृतकों को 2-2 लाख और राज्‍य सरकार ने 4-4 लाख के मुआवजे का किया ऐलान

उत्तराखंड के चमोली जिले के रैणी में रविवार सुबह ग्लेशियर फट गया. बताया जा रहा है कि ग्लेशियर फटने से धौली नदी में बाढ़ आ गई है. इससे चमोली से हरिद्वार तक खतरा बढ़ गया है. सूचना मिलते ही प्रशासन की टीम मौके के लिए रवाना हो गई है. वहीं, चमोली जिले के नदी किनारे की बस्तियों को पुलिस लाउडस्पीकर से अलर्ट कर रही है. कर्णप्रयाग में अलकनंदा नदी किनारे बसे लोग मकान खाली करने में जुटे है. ऋषि गंगा और तपोवन हाईड्रो प्रोजेक्ट पूरी तरह ध्वस्त हो गए हैं. वहीं, आपदा के दौरान रैणी  में भारत-चीन सीमा को जोड़ने वाला पुल क्षतिग्रस्त, सीमा पर आवाजाही ठप हो गई है. तपोवन हाईड्रो प्रोजेक्ट पर काम कर रहे कई मजदूर भी सुरंग में फंसे हैं.

चमोली जिले में एवलांच के बाद ऋषिगंगा हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट पूरी तरह से तबाह हो गया है, जबकि धौलीगंगा पर बने हाइड्रो प्रोजेक्ट का बांध टूट गया, जिससे गंगा और उसकी सहायक नदियों में बाढ़ का खतरा पैदा हो गया है. इसे देखते हुए राज्य में चमोली से लेकर हरिद्वार तक रेड अलर्ट जारी कर दिया गया है. जब यह हादसा हुआ, तब दोनों प्रोजेक्ट पर काफी संख्या में मजदूर कार्य कर रहे थे. इस हादसे में करीब 150 लोगों के मरने की आशंका है, जबकि 10 के शव बरामद किए गए हैं.

इस बीच उत्तराखंड के सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने इस आपदा में जान गंवाने लोगों के परिवार वालों को 4-4 लाख रुपये का मुआवजा देने का ऐलान किया है. वहीं पीएम मोदी ने उत्तराखंड के चमोली में ग्लेशियर के टूटने से हुए दुखद हिमस्खलन के कारण जान गंवाने वालों के परिजनों के लिए PMNRF से 2 लाख रुपये और गंभीर रूप से घायल लोगों को 50,000 रुपये देने का फैसला लिया है.

वहीं, मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा, अगर आप प्रभावित क्षेत्र में फंसे हैं, आपको किसी तरह की मदद की जरूरत है तो कृपया आपदा परिचालन केंद्र के नंबर 1070 या 9557444486 पर संपर्क करें. कृपया घटना के बारे में पुराने वीडियो से अफवाह न फैलाएं. सीएम ने चमोली का दौरा किया. सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा, आप सभी धैर्य बनाए रखें. लोगों की मदद के लिए जो भी जरूरी कदम हैं वो सरकार उठा रही है.

इसके अलावा सीएम रावत ने कहा कि हमारी सेना के लोग वहां पहुंच गए हैं. एनडीआरएफ ( NDRF) की एक टीम दिल्ली से यहां पहुंची है. मेडिकल सुविधा की दृष्टि से वहां सेना, पैरामिलिट्री फोर्सेज और हमारे राज्य के डॉक्टर कैंप किए हुए हैं. जबकि हमने वहां का हवाई सर्वे किया. इसके बाद रेणी गांव जहां तक जाया जा सकता है, वहां तक रोड से जाकर जायजा लिया है. इससे पहले रावत ने बताया कि आईटीबीपी के जवान रस्सी से सुरंग के अंदर 150 मीटर तक पहुंचे हैं. जबकि यह सुरंग लगभग 250 मीटर लंबी है.

सीएम के मुताबिक, इस 13 मेगावाट के ऋषिगंगा पॉवर प्रोजेक्ट में 35 लोग काम करते थे और सभी लापता हैं. इसके अलावा  उत्तराखंड पुलिस के दो जवान भी लापता हैं. इसके अलावा तपोवन पॉवर प्रोजेक्ट में 176 श्रमिक काम कर रहे थे.

इस बीच, एनटीपीसी के महाप्रबंधक आरपी अहीरवाल ने बताया कि निर्माणाधीन परियोजना को बाढ़ से बहुत नुकसान पहुंचा है. उन्होंने कहा कि हालांकि वास्तविक आकलन करने में अभी समय लगेगा लेकिन बाढ़ के पानी के बैराज के ऊपर से बह जाने के कारण वह काफी क्षतिग्रस्त हो गया है. यह परियोजना धौलीगंगा के उपर बन रही है. इसके अलावा, बाढ से बिजली उत्पादन कर रही 13.2 मेगावाट की ऋषिगंगा पनबिजली परियोजना भी पूरी तरह से खत्‍म हो गई है.

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