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Monday, January 18, 2021
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Corona Vaccine: जॉनसन एंड जॉनसन ने रोका कोरोना वैक्सीन का ट्रायल, जानें क्या है वजह

दुनियाभर में कोरोना वायरस के मामले में बढ़ते जा रहे हैं.दुनियाभर की दवा निर्माता कंपनियां कोरोना वायरस की वैक्सीन बनाने के लिए बड़े पैमाने पर परीक्षण कर रही हैं, जिसमें हजारों वॉलंटियर्स हिस्सा ले रहे हैं. इस बीच वैक्सीन को लेकर एक बुरी खबर सामने आई है. कोरोना वैक्सीन पर काम कर रही अमेरिकी कंपनी जॉनसन एंड जॉनसन ने इसके ट्रायल पर फिलहाल रोक लगा दी है. कंपनी ने बताया है कि ट्रायल के दौरान एक वॉलंटियर के बीमार होने के बाद इसपर रोक लगाई गई है.

कंपनी ने बयान में कहा है कि हमने अपने कोरोना वायरस वैक्सीन के क्लीनिकल ट्रायल के लिए वॉलंटियर्स को दी जाने वाली खुराक फिलहाल के लिए रोक दी है. इसमें फेज 3 का ट्रायल भी शामिल है. शोध के दौरान एक प्रतिभागी के बीमार होने की वजह से यह कदम उठाया गया है. हालांकि, कंपनी ने वॉलंटियर की गोपनीयता का हवाला देते हुए बीमारी के बारे में अधिक जानकारी देने से इनकार कर दिया.

इस महीने की शुरुआत में जॉनसन एंड जॉनसन अमेरिका में वैक्सीन बनाने वालों की शॉर्ट लिस्ट में शामिल हुआ है. जॉनसन एंड जॉनसन की एडी26-सीओवी2-एस (SD26-COV2-S Vaccine) वैक्सीन अमेरिका में चौथी ऐसी वैक्सीन है, जो क्लिनिकल ट्रायल के आखिरी फेज में है. पिछली बार की रिपोर्ट में कहा गया था कि वैक्सीन ने शुरुआती स्टडी में कोरोना वायरस के खिलाफ एक मजबूत इम्यून रेस्पॉन्स दिया है. रिसर्चर्स ने कहा था कि अब तक के क्लिनिकल ट्रायल के रिजल्ट के आधार पर कोई गंभीर दुष्प्रभाव नहीं थे.

जॉनसन एंड जॉनसन ने हाल ही में इस वैक्सीन के आखिरी फेज का ट्रायल शुरू किया था. कंपनी ने तब कहा था कि इसके तहत अमेरिका, दक्षिण अफ्रीका, ब्राजील, चिली, कोलंबिया, मैक्सिको और पेरू में 60 हजार लोगों पर वैक्सीन का ट्रायल किया जाएगा. जॉनसन एंड जॉनसन की वैक्सीन के ट्रायल पर रोक लगने की खबर जाहिर तौर पर एक बड़ा झटका है. इससे पहले एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन पर रोक लगा दी गई थी.

कोरोना की वैक्सीन बनाने की रेस में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन सबसे आगे चल रही थी, लेकिन बीते दिनों कुछ वॉलंटियर की कोविशील्ड वैक्सीन लेने के बाद तबीयत खराब हो गई, जिसके बाद 6 सितंबर तीसरे फेज का ट्रायल रोकना पड़ा. हालांकि,ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन का ब्रिटेन और भारत में दोबारा ट्रायल शुरू हो चुका है. अमेरिका या अन्य देशों ने अभी दोबारा मंजूरी नहीं मिल पाई है.