RBI Monetary Policy Live: RBI ने त्योहारों से पहले ग्राहकों को दिया झटका, नहीं मिलेगी EMI पर राहत

योहारी सीजन से पहले रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी)  बैठक के नतीजों का ऐलान हो गया है. आरबीआई गवर्नर शक्‍तिकांत दास ने प्रेस कॉन्‍फ्रेंस के जरिए बैठक के नतीजों के बारे में जानकारी दी. इस दौरान उन्‍होंने बताया कि रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया गया है.  मतलब ये कि रेपो रेट चार फीसदी पर बरकरार है.

आपको बता दें कि त्‍योहारी सीजन को देखते हुए ये उम्‍मीद की जा रही थी कि आरबीआई डिमांड बढ़ाने के लिए रेपो रेट पर कैंची चला सकता है. हालांकि, ऐसा कुछ नहीं हुआ है. बता दें कि बीते अगस्‍त महीने में आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति की बैठक में भी रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया गया था. हालांकि, केंद्रीय बैंक इससे पहले पिछली दो बैठकों में रेपो रेट में 1.15 प्रतिशत की कटौती कर चुका है. फिलहाल रेपो दर चार प्रतिशत, रिवर्स रेपो दर 3.35 प्रतिशत है. 

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  • आरबीआइ ने एलान किया है कि दिसंबर, 2020 से RTGS किसी भी समय भी किया जा सकेगा.
  • आरबीआई गवर्नर ने कहा, ‘तेज और मजबूत रिकवरी संभव है. लिक्विडिटी व आसान वित्तीय स्थितियों तक पहुंच के लिए आवश्यक कदम उठाने के लिए तैयार हैं. हम गैर-विघटनकारी उधार कार्यक्रम सुनिश्चित करने के लिए लिक्विडिटी डाल रहे हैं. शेष सरकारी उधार को एक गैर-विघटनकारी तरीके से पूरा किया जाएगा.
  • आरबीआइ गवर्नर ने कहा, ”भय और निराशा का माहौल अब आशा में बदल रहा है. वित्त वर्ष 2020-21 की चौथी तिमाही में मुद्रास्फीति में कमी आ सकती है और इसके लक्ष्य के आसपास रहने की संभावना है. चौथी तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर सकारात्मक अंकों में रह सकती है. विभिन्न सेक्टर्स में वेरिएशन के साथ भारत में तेज रिकवरी होने की संभावना है. कृषि, कंज्यूमर गुड्स, बिजली और फार्मा सेक्टर्स में तेज रिकवरी हो सकती है.”
  • आरबीआई गवर्नर ने कहा, ‘वित्त वर्ष 2021 की जीडीपी में 9.5 फीसद की मंदी देखी जा सकती है. सितंबर महीने में पीएमआई बढ़कर 56.9 हो गया, यह जनवरी 2012 के बाद से सबसे अधिक है. मौजूदा वित्त वर्ष की पहली छमाही में उधार की औसत लागत 5.82 फीसद पर है, यह 16 साल में सबसे कम है.
  • आरबीआइ गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा, ”मैं आशावादी हूं. आर्थिक स्थिति में हो रहे बदलाव इस बात की ओर इशारा कर रहे हैं कि हम बेहतर कल का सपना देख सकते हैं. तीसरी तिमाही में वैश्विक अर्थव्यवस्था की गतिविधियों में असमान रूप से ही लेकिन रिबाउंड देखने को मिला है.
  • वैश्विक आर्थिक स्थिति अच्छी स्थिति में है. वित्त वर्ष 2020-21 की पहली तिमाही का गहरा संकुचन पीछे छूट चुका है. भारत कोविड से पूर्व की वृद्धि के आंकड़े को छू सकता है.”
  •  आरबीआइ गवर्नर ने अपने संवाददाता सम्मेलन की शुरुआत में मौद्रिक नीति समिति के नए सदस्यों का स्वागत किया और उनका आभार प्रकट किया.
  • आरबीआइ गवर्नर ने अपने संवाददाता सम्मेलन की शुरुआत में मौद्रिक नीति समिति के नए सदस्यों का स्वागत किया और उनका आभार प्रकट किया. उन्होंने विश्लेषणात्मक सहयोग के लिए टीम का भी आभार जताया. उन्होंने कहा, ”मौद्रिक नीति समिति ने वृद्धि को मजबूती देने के लिए सर्वसम्मति से रेपो रेट को चार फीसद पर अपरिवर्तित रखने के पक्ष में मत दिया और रुख को उदार बनाया रखा.”
  • आरबीआई ने रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया था। यह वर्तमान में चार प्रतिशत है और रिवर्स रेपो रेट को 3.35 प्रतिशत पर स्थिर रखा गया है.
  • नवगठित मौद्रिक नीति समिति की बैठक सात, आठ और नौ अक्टूबर को हुई. रेपो रेट चार फीसद पर यथावत.
  • केंद्रीय बैंक ने ब्याज दर को लेकर अपने रुख को ‘उदार’ बनाए रखा है.

आपको यहां बता दें कि रिजर्व बैंक ने पहले मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक का दिन 28 सितंबर को तय किया था. लेकिन समिति के सदस्‍यों की नियुक्‍ति की वजह से बैठक को आगे के लिए टाल दिया गया था. सरकार ने एमपीसी में तीन सदस्यों की नियुक्ति कर दी है. तीन जाने माने अर्थशास्त्रियों अशिमा गोयल, जयंत आर वर्मा और शशांक भिडे को एमपीसी का सदस्य नियुक्त किया गया है. इन सदस्यों की नियुक्ति चेतन घाटे, पामी दुआ, रविन्द्र ढोलकिया के स्थान पर की गई है. इनका कार्यकाल सितंबर में पूरा हो गया था. 

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