बार-बार बज रहा था गर्लफ्रेंड का मोबाइल, गुस्से में गर्लफ्रेंड का कत्ल कर दिल्ली से लखनऊ स्कूटी से भागा प्रेमी, दूसरी प्रेमिका ने करवाया अरेस्ट

दिल्ली में छावला इलाके के गोयला डेयरी में एक किराए का मकान में रह रहे प्रेमी के पास जब उसकी गर्लफ्रेंड आती है तो उसके पास कहीं से बार-बार फोन आ रहा था. प्रेमी को शक हुआ तो उसने गर्लफ्रेंड का कत्ल कर शव को बेड में छिपा दिया और फिर अपनी दूसरी गर्लफ्रेंड के पास असम भाग गया जहां से उसे पुलिस ने प्लानिंग बनाकर पकड़ा.

23 सितंबर को शादीशुदा प्रेमी सतीश और प्रेमिका दिशु कुमारी हमेशा की तरह मिलते है लेकिन वो दिन प्यार के कत्ल का गवाह बन गया. दिशु कुमारी का फोन उस दिन हर पांच मिनट में बज रहा था. शक का बीज सतीश के मन को पहले से ही जलाए बैठा था इस बात को लेकर झगड़ा बढ़ गया. फिर सतीश के हाथों दिशु कुमारी का मर्डर हो गया. सतीश ने गुस्से की तपिश में ऐसा गला दबाया कि प्रेमिका की सांसें उखड़ गई. सतीश समझ गया कि उसके हाथ से मर्डर हो चुका है. फिर उसने कंबल में शव को लपेटा और बेड के अंदर दबा दिया. उसके बाद वह स्कूटी से फरार हो गया.

मर्डर का राज 25 सितंबर को खुला जब बंद कमरे से बदबू आने लगी. मौके पर पुलिस आई तो सब हक्के-बक्के रह गए. बेड के अंदर लड़की का शव पड़ा था. पुलिस ने जब मामले की कड़ियां जोड़ी तो राज खुला कि शादीशुदा आशिक सतीश ने अपनी प्रेमिका का अंत कर दिया जो गुरुग्राम के कॉल सेंटर में साथ जॉब करते हुए मिली थी.

मर्डर करके सतीश 23 सितंबर को ही दिल्ली से लखनऊ तक स्कूटी की सवारी करते हुए भाग चुका था. फिर बस पकड़ कर असम पहुंच गया. वहां उसकी पुरानी गर्लफ्रेंड रहती थी.पुलिस ने अपने खुफिया तंत्र को इस्तेमाल करते हुए CCTV खंगाले ओर टेक्निकल सर्विलांस से आरोपी सतीश के प्यार, गुस्से, नाराजगी और फिर मर्डर की गुत्थी को समझ लिया लेकिन आरोपी तो पुलिस से दूर निकल चुका था.

दिल्ली की स्मार्ट पुलिस ने सतीश की असम वाली गर्लफ्रेंड भी खोज निकाली. हवाई जहाज से पुलिस टीम पीछा करते हुए बगैर समय गंवाए आरोपी के नजदीक पहुंच गई.सतीश भी पुलिस से बचने के लिए फूंक-फूंक कर कदम रख रहा था और पुलिस आरोपी से दो कदम आगे थी. पुलिस ने सतीश की असम वाली गर्लफ्रेंड को कॉन्फिडेंस में लिया. जैसे ही सतीश अपनी गर्लफ्रेंड से मिलने पहुंचा, पुलिस ने उसे दबोच लिया. असम वाली गर्लफ्रेंड ने बाथरूम में जाकर कॉल किया कि आरोपी सतीश आ चुका है. तब तक शातिर दिमाग का आरोपी कानून के रडार पर चढ़ चुका था. अगर पुलिस थोड़ी सी भी लेट हो जाती तो आरोपी ने असम के डिब्रूगढ़ से मेघालय निकलने की पूरी तैयारी कर ली थी और बाकायदा टैक्सी तक बुक हो चुकी थी.

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