बिहार के DGP गुप्तेश्वर पांडेय ने ली स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति, बक्सर या भोजपुर से NDA के टिकट पर लड़ सकते हैं चुनाव

बिहार के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) गुप्तेश्वर पांडेय ने मंगलवार को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली हैं.गृह विभाग ने उनकी स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति की मंजूरी प्रदान कर दी है. अब वे राष्‍ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के प्रत्‍याशी के रूप में बिहार विधानसभा चुनाव लड़ेंगे.माना जा रहा है कि वे बक्सर या आरा जिले की किसी सीट से विधानसभा चुनाव लड़ेंगे. पिछले दिनों बक्सर में जेडीयू जिलाध्यक्ष के साथ उनकी बैठक भी हो चुकी है. इसके पूर्व भी वे 2009 में वीआरएस का आवेदन देकर लोकसभा चुनाव लडऩे की कोशिश कर चुके थे.

गुप्तेश्वर पांडेय को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति देने के बाद बिहार होमगार्ड और अग्निशमन सेवाएं के महानिदेशक संजीव कुमार सिंघल को बिहार के डीजीपी का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है. सिंघल 1988 बैच के आईपीएस हैं.

गुप्तेश्वर पांडेय डीजीपी के पद से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर चुनाव लड़ने वाले बिहार के पहले अधिकारी होंगे. डीजीपी रहते हुए उन्‍हें मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार का करीबी अधिकारी माना जाता था. अब उन्‍होंने नीतीश कुमार की पार्टी से ही चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी है.

बता दें कि गुप्तेश्वर पांडेय 31 जनवरी 2019 को बिहार के डीजीपी बने थे. बतौर डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय का कार्यकाल 28 फरवरी 2021 तक था. हाल के दिनों में अपने कई उल्लेखनीय कार्यों को लेकर वे चर्चा में बने रहे. मुख्य रूप से बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की माैत के मामले में वे राष्‍ट्रीय स्‍तर पर चर्चा में आए. सुशांत मामले में मुख्‍य आरोपित रिया चक्रवर्ती द्वारा मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार के खिलाफ सवाल उठाने पर गुप्‍तेश्‍वर पांडेय ने रिया की औकात को लेकर सवाल कर विवाद भी खड़ा कर दिया था. बाद में उन्‍हें इसके लिए सफाई भी देनी पड़ी थी. आरोप-प्रत्यारोप के क्रम में शिवसेना के राष्ट्रीय प्रवक्ता संजय राउत ने उनपर शाहपुर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने तक का आरोप लगाया था. हालांकि, हर बार वे चुनाव लडऩे की चर्चाओं पर विराम लगाते रहे.

गुप्तेश्वर पांडेय विशेष शाखा में आइजी रहे. वे मुजफ्फरपुर और दरभंगा जोन के आइजी तथा एडीजी मुख्यालय, एडीजी बेतार और एडीजी बीएमपी भी रहे. गुप्तेश्वर पांडेय को आम जनमानस के अलावा सरकार की नजर में अपराध नियंत्रक और कड़क प्रशासक की छवि रही. लॉकडाउन के दौरान पुलिसकर्मियों के साथ सीधी बात कर उनका हौसला बढ़ाने के लिए भी उन्होंने व्यक्तिगत स्तर पर बेहतर प्रयास किया.

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