भारत में क्यों तेजी से बढ़ रहे कोरोना के इतने केस; जानें इस भयानक रफ्तार के पीछे के कारण

भारत में रोजाना कोरोना संक्रमित मरीजों का आंकड़ा 1 लाख के पास पहुंच रहा है. संक्रमण की इस भयानक रफ्तार के पीछे  का सबसे संक्रामक प्रतिरूप A2a है. कोरोना वायरस के इस स्ट्रैन ने चंद दिनों के अंदर हिंदुस्तान की 70 फीसदी मरीजों को अपनी गिरफ्त में लिया है. हैदराबाद के सेंटर फॉर सेलुलर एंड मोलिक्यूलर बायोलॉजी के ताजा अध्ययन में इस बात का खुलासा हुआ है कि A2a कोरोना वायरस का ज्यादा संक्रामक प्रतिरूप है और भारत में कोरोना पॉजिटिव मरीजों में से 70 फीसदी से ज्यादा मरीज A2a प्रतिरूप से ही प्रभावित हैं. संक्रमण की तेज रफ्तार चिंता का विषय बन गई है. इसी वजह से कोरोना वायरस की चपेट में आने वाले लोगों की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है.

पहले भारत में कोरोना वायरस के A3i स्ट्रैन से संक्रमित मरीजों की संख्या सबसे ज्यादा थी. A3i स्ट्रैन के फुटप्रिंट करीब 41 फीसदी मरीजों में पाए गए थे. देश में कोरोना पॉजिटिव मरीजों में सबसे ज्यादा यही स्ट्रैन पाया जा रहा था. लेकिन इसमें मौजूद आरडीआरपी नाम का एंजाइम खुद वायरस के लिए ही घातक साबित होने लगा और इस एंजाइम के वजह से कोरोना के A3i प्रतिरूप के संक्रमण का अनुपात 41 फीसदी से घटकर 18 प्रतिशत पर पहुंच गया है. वैज्ञानिकों का कहना है कि इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं होगी कि धीरे-धीरे कोरोना का A3i प्रतिरूप हिंदुस्तान से गायब हो जाए. A3i की जगह अब A2a ने ले ली है. यह ज्यादा तेजी से फैलने वाला कोरोना स्ट्रैन है.

दुनियाभर में सबसे ज्यादा कोरोना के A2a स्ट्रैन से लोग संक्रमित हुए हैं और इसी स्ट्रैन को ध्यान में रखकर वैक्सीन बनाई जा रही हैं. हिंदुस्तान में वैज्ञानिकों के मन में पहले सवाल था कि आने वाली वैक्सीन, भारत में कोरोना वायरस के खिलाफ कारगर साबित होगी भी या नहीं, क्योंकि भारत में कोरोना का A3i स्ट्रैन ज्यादा था, जबकि वैक्सीन मुख्य रूप से A2a को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही हैं. लेकिन देखते ही देखते A2a ने भारत में पैर पसार लिए हैं.

सीसीएमबी के निदेशक डॉ. राकेश कुमार मिश्रा के मुताबिक ‘आशंका के मुताबिक A2a ज्यादा संक्रामक स्ट्रैन है और इसने पूरी दुनिया की तरह बहुत जल्दी भारत में अपने पैर पसार लिए हैं. इस बात के प्रमाण नहीं हैं कि यह ज्यादा कठिन स्ट्रैन है. लेकिन पूरी दुनिया में एक ही तरह का वायरल जीनोम मौजूद होने से अच्छी बात यह होगी कि एक ही वैक्सीन और दवा इस म्यूटेशन के खिलाफ समान रूप से असरकारक प्रभाव पैदा कर सकेगी’. अध्ययन में यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि कोरोना का A2a प्रतिरूप A3i से ज्यादा घातक है या नहीं. लेकिन इसमें कोई शक नहीं है कि इसके संक्रमण की रफ्तार काफी ज्यादा है और जब तक कारगर वैक्सीन तैयार नहीं हो जाती, तब तक कोरोना के A2a प्रतिरूप से बचना ही एकमात्र उपाय है.

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