भारत में 225 रुपए में मिलेगा कोरोना वैक्सीन, सीरम इंस्टीट्यूट ने बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन और गावी के साथ किया करार

देश में ऑक्सफोर्ड की वैक्सीन तैयार करने वाले सीरम इंस्टीट्यूट की ओर से एक खबर आई है. सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन और वैक्सीन अलायंस संस्था गावी के साथ एक करार किया है. इस करार के तहत भारत और निम्न आय वाले 92 देशों को मात्र 3 डॉलर यानी 225 रुपए में वैक्सीन मिल सकेगी.

सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने शुक्रवार को कहा कि बिल एंड मिलिंडा गेट्स फाउंडेशन भारत में 10 करोड़ कोविड-19 वैक्सीन तैयार करने के लिए 150 मिलियन डॉलर की फंडिंग देगी. सीरम इंस्टीट्यूट साथ ही Astra Zeneca और Novavax के साथ मिलकर कोविड-19 वैक्सीन तैयार करने पर काम कर रही है. दुनिया की सबसे बड़ी वैक्सीन मेकर में शुमार सीरम इंस्टीट्यूट को गेट्स फाउंडेशन से यह फंडिंग इंटरनेशनल वैक्सीन अलायंस GAVI के जरिए मिल सकेगी.

सीरम इंस्टीट्यूट ने शुक्रवार को कहा, ‘कंपनी द्वारा रिस्क मैन्युफैक्चरिंग को यह फंडिंग सपोर्ट करेगा, जिसे Astra Zeneca और Novavax के साथ साझेदारी में तैयार किया जा रहा है.’ अगर इस वैक्सीन को सभी तरह के लाइसेंस प्राप्त हो जाते हैं और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO – World Health Organization) के मानदंडों पर खरा उतरता है तो इसे प्रोक्योरमेंट के लिए उपलब्ध करा दिया जाएगा. Novavax इंक ने बुधवार को कहा कि संभावित कोविड-19 वैक्सीन के डेवलपमेंट और कॉमर्शियलाइजेशन के लिए उसे सीरम इंस्टीट्यूट के साथ सप्लाई व लाइसेंस सहमति मिल चुकी है.

वैक्सीन के ह्यूमन ट्रायल पूरे होते ही इसके उपलब्ध होने की सम्भावना है. सीरम इंस्टीट्यूट के सीईओ अदार पूनावाला के मुताबिक, वैक्सीन इस साल के अंत तक उपलब्ध हो सकती है.

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और एस्ट्राजेनेका कंपनी भारत के सीरम इंस्टीट्यूट के साथ मिलकर वैक्सीन तैयार कर रही हैं. भारत में यह वैक्सीन कोविशील्ड (AZD1222) के नाम से लॉन्च होगी.

बड़े स्तर पर होगा ट्रायल
नेशनल बायोफार्मा मिशन एंड ग्रैंड चैलेंज इंडिया प्रोग्राम के तहत सरकार और मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन के बीच एक करार हुआ है. इस प्रोग्राम के तहत ही वैक्सीन का बड़े स्तर पर ट्रायल होगा. इसके लिए कई इंस्टीट्यूट सिलेक्ट किए जा चुुकेे हैं.

इनमें हरियाणा के पलवल का INCLEN, पुणे का KEM हॉस्पिटल, हैदराबाद का सोसायटी फॉर हेल्थ एलायड रिसर्च एंड एजुकेशन, चेन्नई का नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एपिडेमियोलॉजी और वेल्लोर का क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज शामिल हैं.

इसके अलावा एम्स दिल्ली-जोधपुर, पुणे का बीजे मेडिकल कॉलेज, पटना का राजेंद्र मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, मैसूर का जेएसएस एकेडमी और हायर एजुकेशन एंड रिसर्च, गोरखपुर का नेहरू हॉस्पिटल, विशाखापट्टनम का आंध्र मेडिकल कॉलेज और चंडीगढ़ का पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च भी इस सूची में शामिल हैं.

ब्रिटेन, अफ्रीका और ब्राजील में ट्रायल
इस वैक्सीन का ट्रायल ब्रिटेन, साउथ अफ्रीका और ब्राजील में शुरू हो चुका है. भारत में इसका ट्रायल मुम्बई और पुणे में अगस्त के अंत में शुरू होगा. भारत में यह वैक्सीन कोविशील्ड के नाम से लॉन्च होगी. कंपनी के सीईओ अदार पूनावाला का कहना है कि अगर ट्रायल कामयाब होता है तो 2021 की पहली तिमाही तक 30 से 40 करोड़ डोज तैयार किए जा सकेंगे. वैक्सीन इस साल के अंत तक आ सकती है.

अब तक वैक्सीन सुरक्षित साबित हुई

मेडिकल जर्नल द लैंसेट में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, यह वैक्सीन पूरी तरह सुरक्षित और असरदार है. इस जानकारी के बाद ऑक्सफोर्ड की वैक्सीन फ्रंट रनर वैक्सीन की लिस्ट में आगे आ गई है. ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी ने भी कहा है कि AZD1222 नाम की इस वैक्सीन को लगाने से अच्छा इम्यून रिस्पॉन्स मिला है.वैक्सीन ट्रायल में लगी टीम और ऑक्सफोर्ड के निगरानी समूह को इस वैक्सीन में सुरक्षा को लेकर कोई चिंता वाली बात नजर नहीं आई.

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