मिलावटी सेनेटाइजर से सावधान: सेनेटाइजर के इस्तेमाल से त्वचा रोग, कैंसर, किडनी, फेफड़े, प्रजनन तंत्र जैसी गंभीर बीमारी होने का खतरा

कोरोना के संक्रमण की वजह से सेनेटाइजर की खपत बढ़ गई है. ब्रांडेड के साथ ही लोकल कंपनियां भी सेनेटाइजर बना रही है. ऐसे में मानको की अनदेखी  हो रही है. मिलावटी सेनेटाइजर के लगातार इस्तेमाल से खुजली, खुश्क त्वचा, लाल दाग, त्वचा रोग, कैंसर, किडनी, फेफड़े, प्रजनन तंत्र जैसी बीमारियां होने का खतरा है. सेनेटाइजर के इस्तेमाल से होने वाली बीमारियों की वजह से पीएमसीएच में हर दिन लगभग 20 मरीज पहुंच रहे हैं.

डॉक्टरों का कहना है कि लाल, पीला, हरा, नारंगी से कई कलर में बने सेनेटाइजर लोगों को फायदे की जगह नुकसान पहुंचा रहा है. पीएमसीएच के डॉक्टर विकास शंकर के मुताबिक सेनेटाइजर में 60 से 75 फीसदी तक अल्कोहल होना जरुरी है. लोकल स्तर पर बनाए जाने वाले सेनेटाइजर में मानकों की अनदेखी की जाती है.

सेनेटाइजर में ट्रॉइक्लोसान नामक केमिकल होता है, जिसे हाथ की स्किन सोख लेती है.  बार-बार इस्तेमाल से जलन और खुजली जैसी समस्याएं होती है. सेनेटाइजर में अधिक मात्रा में फैथलेट्स मिलाने से लीवर, किडनी, फेफड़े तथा प्रजनन तंत्र को नुकसान पहुंचता है.

कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए मास्क, सेनेटाइजर का इस्तेमाल करना बेहद जरुरी है. लेकिन, दोनों की क्वालिटी अच्छी होनी चाहिए. यदि मानकों की अनदेखी कर बनाए गए सेनेटाइजर का लगातार इस्तेमाल किया जाता है. तो गंभीर परिणाम हो सकते हैं. खुजली, खुश्क के साथ ही त्वचा सहित अन्य बीमारियां हो सकती है.

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