CM नीतीश कुमार ने वीडियो कांफ्रेंसिंग से पूर्वी चंपारण के सत्तरघाट पुल का किया उद्घाटन

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मंगलवार को वीडियो काॅन्फ्रेंसिंग से पूर्वी चंपारण के सत्तरघाट पुल का उद्घाटन किया. इसकी मांग वर्षों से क्षेत्र के लोग कर रहे थे. पुल बन जाने से गोपालगंज से आवागमन में सुविधा होगी. अभी लोगों को काफी दूरी तय करनी पड़ती है. मौके पर जिले के प्रभारी मंत्री विनोद नारायण झा, कला संस्कृति मंत्री प्रमोद कुमार, जिलाधिकारी शीर्षत कपिल अशोक व अन्य मौजूद  रहे. जिले के केसरिया प्रखंड अंतर्गत गंडक नदी के सत्तरघाट पर नवनिर्मित उच्चस्तरीय आरसीसी पुल पर 263.48 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं. पुल की लंबाई 1440 मीटर है.

यह पुल गंडक नदी पर बैकुंठपुर से चकिया को जोड़ा है. इससे सिवान, छपरा, गोपालगंज होते हुए नेशनल हाईवे 28 के जरिए उत्तर बिहार के जिलों की संपर्कता हो जाएगी. इस पुल से पटना से मसरख होते हुए रक्सौल तक सीधा रास्ता उपलब्ध होगा. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 20 अप्रैल 2012 को इस पुल का शिलान्यास किया था. इसी प्रकार पथ निर्माण विभाग द्वारा निर्मित लखीसराय बाईपास रोड में दोनों रेलवे लाइन पर आरओबी का निर्माण किया गया है. इस परियोजना की कुल लंबाई साढ़े 6 किलोमीटर है. 

बैकुंठपुर प्रखंड में बने सत्तरघाट महासेतु से उत्तर बिहार के दस जिलों की दूरी सिमट जाएगी. गोपालगंज जिला मुख्यालय से मुजफ्फरपुर, शिवहर, सीतामढ़ी, पूर्वी चंपारण की दूरी 30 फ़ीसदी कम हो जाएगी. इसके अलावे सिवान व सारण जिले से भी इन जिलों की दूरी 50 किलोमीटर तक कम हो जाएगी. सत्तरघाट महासेतु बनने से बैकुंठपुर के सीमावर्ती कई गांवों में ग्रामीणों के बीच खुशी की लहर दौड़ गई है.

सत्तरघाट महासेतु के निर्माण से पड़ोसी देश नेपाल की दूरी भी कई जिलों के लिए कम हो गई है. सिवान, सारण, गोपालगंज के अलावे उत्तर प्रदेश के देवरिया, कुशीनगर,बलिया, वाराणसी जिलों से नेपाल की दूरी सौ किलोमीटर तक कम हो गई है. राम-जानकी पथ इसी महासेतु से होकर बन रही है जिससे अयोध्या से जनकपुर तक जाने का रास्ता अब आसान साबित होगा. राम-जानकी पथ के निर्माण के बाद सैलानियों के आवागमन के लिए यह मुख्य मार्ग साबित होगा.सत्तरघाट महासेतु होकर राम-जानकी पथ गुजरेगा. इससे पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा. बोधगया से केसरिया बौद्ध स्तूप तक जाने वाले सैलानियों के लिए यह संक्षिप्त और अहम मार्ग साबित होगा जबकि नेपाल के जनकपुर धाम जाने के लिए श्रद्धालुओं के लिए यह आसान रास्ता बन गया है. 

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