अमित शाह बोले, बिहार विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार के नेतृत्व में दो तिहाई बहुमत से बनाएंगे सरकार

बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने रविवार को दिल्ली से बिहार के लिए चुनावी शंखनाद किया. अपनी  वर्चुअल रैली में उन्होंने कांग्रेस और आरजेडी पर जमकर निशाना साधा. अमित शाह ने बिहार के सीएम नीतीश कुमार की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने कोरोना काल में बिहार के लोगों के लिए अच्छा काम किया है.

 नीतीश कुमार और सुशील मोदी दोनों प्रसिद्धि करने में थोड़े से कच्चे हैं. वो रोड पर खड़े होकर थाली नहीं बजाते हैं, वो चुपचाप सहायता के लिए काम करने वाले लोग हैं. अमित शाह ने एकबार फिर स्पष्ट किया कि आने वाले विधानसभा चुनाव एनडीए नीतीश कुमार के नेतृत्व में दो तिहाई बहुमत से सरकार बनाएंगी. 

अमित शाह ने कहा कि देश का कोई भी हिस्सा चाहे मुंबई, दिल्ली, हरियाणा, गुजरात, कर्नाटक, तमिलनाडु हो,उसकी नींव में जाएंगे तो मेरे बिहार के प्रवासी मजदूर के पसीने की महक आती है. बिहार के व्यक्ति का पसीना इस देश के विकास की नींव में है. उन्होंने कहा कि नरेन्द्र मोदी ने अभी-अभी गत कैबिनेट में निर्णय लिया की ‘एक देश-एक राशन कार्ड’.

बिहार, उत्तर प्रदेश, ओडिशा के मजदूर देश के कई हिस्सों में काम करते हैं. इससे अब श्रमिक भाई-बहन अपने हिस्से का राशन, देश में कहीं पर भी हों वहां से ले सकेंगे. उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी के बाद नरेन्द्र मोदी ने सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों से कहा कि सभी जगह प्रवासी मजदूरों को सम्मान से रखा जाए और उनके लिए 11 हजार करोड़ रुपये राज्यों को दिए.

 जनता कर्फ्यू भारत के लोकतांत्रिक इतिहास के अंदर स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाएगा कि देश के एक नेता की अपील पर कोई पुलिस बल प्रयोग किए बगैर पूरे देश ने घर के अंदर रहकर अपने नेता की अपील का सम्मान किया. चाहे उन्होंने थाली और घंटी बजाने को कहा, चाहे दीया जलाने को कहा, चाहे सेना के जवानों द्वारा आकाश से कोरोना वॉरियर्स पर फूल बरसाने की बात हो, ये सब पीएम मोदी  की अपील ही थी.  कुछ लोगों ने इसे राजनीतिक प्रोपेगेंडा कहा, मगर जो कह रहे हैं उनको ये मालूम नहीं है कि ये राजनीतिक प्रोपेगेंडा नहीं है बल्कि ये देश को एक बनाने की मुहिम है.

  आरसीईपी की चर्चा कांग्रेस शुरु करके गई थी. इसकी वजह से छोटे किसान, मछुवारे, छोटे कारोबारी, छोटे उद्योग ये सब तबाह हो जाते. मोदी जी ने छोटे किसानों, छोटे व्यापारियों के हित में दृढ़ता से फैसला लेते हुए आरसीईपी समझौते से भारत को अलग कर लिया. उन्होंने कहा कि  राहुल गांधी हमेशा कहते थे कि किसानों का कर्ज माफ करो. 10 साल उनकी सरकार रही थी, तो वो दावा करते हैं कि करीब 3 करोड़ किसानों का 60 हजार करोड़ रुपये का कर्ज माफ किया. 

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