मासूम का क्या कसूर …दर-दर भटकने को हुआ मजबूर

दरभंगा : कोरोना ने लोगों के खान-पान, रहन-सहन, आहार-व्यवहार को ही नहीं बदला, बल्कि मानवीय संवेदनाओं को भी तहस-नहस कर दिया. लोग मानवीय मूल्यों को भूलकर अपने तक सिमट कर रह गए. लोग एक-दूसरे से बात करने से भी कतराने लगे है. नित्य दिन मनुष्य के गुणों में बदलाव देखा जा रहा है. लोग उस पांच वर्ष के अबोध बच्चे को भी अपने पास नहीं फटकने देना चाह रहे, जिसके माता-पिता इन दिनों डीएमसीएच के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती है.

पांच साल के बच्चे के पिता कोरोना पॉजिटिव मरीज है, जबकि मां निगेटिव है. बावजूद वे 14 दिनों के लिए डीएमसीएच के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती है. बच्चे की भी जांच की गई, लेकिन इसमें कोरोना का कोई भी लक्षण नहीं पाया गया.  समस्या तब खड़ी हुई जब जिला प्रशासन ने बच्चे को उसके घर भेजा. शहरी क्षेत्र के मीरसिकार टोला निवासियों ने इस बच्चे को मोहल्ले में रखने से मना कर दिया.

इसे लेकर घंटाें हाई वोल्टेज ड्रामा चला. इसके बाद बच्चे को एमएलएसएम कॉलेज में रखने की बात हुई, लेकिन वहां भी लोगाें ने हंगामा करना शुरु कर दिया. फिर, शहर के शफी मुस्लिम हाईस्कूल के एक अलग कमरे में बच्चे को रखा गया. यह बात जैसे ही लोगों को पता चली, वहां भी लोग हंगामा करने लगे. थक-हारकर प्रतिदिन बच्चे का ठिकाना बदलने की नौबत आ गई है.

सूत्रों की मानें तो सामाजिक और प्रशासनिक स्तर पर बच्चे को एक गुप्त जगह पर रखा गया है. यहां उसे खाने-पीने और उसके मनोरंजन की व्यवस्था की गई है. लेकिन, यह भी डर बना हुआ है कि यदि फिर किसी को इस बच्चे के यहां रखे जाने की जानकारी लग गई तो उसी किसी और जगह शिफ्ट करना पड़ेगा. ऐसे में इस अबोध बच्चे का क्या कसूर. एक ओर बच्चे के माता-पिता डीएमसीएच में भर्ती है, तो वहीं दूसरी ओर इसे पनाह देने को कोई तैयार नहीं है.

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