हाल बेहाल हो रहा; काम बंद हुआ तो हरियाणा, इलाहाबाद से पैदल चलकर पटना पहुंच रहे हैं लोग

लॉकडाउन के दौरान बस-ट्रेन के पहिये भले थम गए हों, पर अपनों तक पहुंचने के लिए बिहार के मजदूर कई दिनों से पैदल चल रहे हैं. अपने पांव से नहीं, बल्कि जिद से एक प्रदेश से दूसरे प्रदेश को नाप दे रहे हैं. लॉकडाउन में समस्या केवल खाने की ही नहीं, अपनों तक पहुंच पाने की भी है. ये बात उन लोगों की है, जो पिछले कई दिनों में पैदल चलकर इलाहाबाद और हरियाणा से पटना के बाइपास पर पहुंच रहे हैं. गुरुवार को भी बिहार के कई जिलों के मजदूर सिर पर गठरी लादे घर की दहलीज तक पहुंचने की उम्मीद से पटना पहुंचे . इनकी यात्रा की कहानी रूह कंपा देती है.

पैदल चलते-चलते पैर में पड़ गये छाले 
इलाहाबाद से भागलपुर जा रहे रामप्रवेश ने बताया कि हमारे सभी साथियों ने मिलकर घर लौटने की सोची और हमलोग पैदल चल पड़े. कभी ट्रक में सवार तो कभी पैदल चलना पड़ा. सफर में कई जगह परेशानी झेलनी पड़ी. कहीं पुलिस की लाठी खानी पड़ी तो कभी खुले आसमान के नीचे रात गुजारनी पड़ी. पैदल चलते हुए पैर में छाले भी पड़ गए, तब भी हमलोगों ने चलना बंद नहीं किया. पटना पहुंचने पर राहत मिली कि अब घर पहुंच जाएंगे.

नहीं मिल रही गाड़ी, पैदल ही सहारा 
बिहार के बाहर रह रहे लोगों के लिए पटना पहुंच जाना भी किसी बड़ी मनोकामना के पूरी होने से कम नहीं. पटना बाइपास पर हर दिन ऐसे लोगों को जाते देखा जा सकता है. उम्मीद लगाए कई लोग गाड़ियों का इंतेजार करते रहते हैं, पर कोई गाड़ी नहीं चल रही। ऐसे में मन में यही सवाल लेकर निकल जा रहे कि अभी और कितनी यात्रा? कोई साधन मिलेगा या नहीं. घर पहुंचेंगे या नहीं.

फैक्ट्री बंद, पांच-पांच सौ रुपए देकर कहा लौट जाओ अपने-अपने घर
हरियाणा स्थित फैक्ट्री में काम करने वाले सूरज जैसे-तैसे पटना पहुंचे. मुजफ्फरपुर के रहने वाले सूरज ने बताया कि लॉक डाउन के कारण फैक्ट्री बंद हो गई. फैक्ट्री मालिक ने पांच-पांच सौ रुपए देकर घर जाने की बात कही. सूरज ने बताया कि इतने पैसे नहीं थे कि वहां रहकर गुजारा किया जा सकता था. सीमित पैसोंं के बीच सत्तू-बिस्किट और पानी पीते हुए पैदल अपने घर जाने को मजबूर हैं. हमारे जैसे कई लोग हैं, जो अलग-अलग शहरों से पैदल चलकर आए हैं. बस इन्हीं के सहारे दिन-रात चलते-चलते किसी तरह अपने घर पहुंच जाना चाहते हैं.

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