कोरोना के खौफ से डरा बच्चा पागलपन की हद तक पहुंचा, जानें फिर क्या हुआ

कोरोना का खौफ पागलपन तक ले जा सकता है. खासकर ज्यादा संवेदनशील और अपरिपक्व मन पर इसका गहरा असर हो रहा है. गोपालगंज, बिहार के एक किशोर को कोरोना के डर ने ऐसा डसा कि उसकी हालत गंभीर हो गई. एक्यूट साइकोसिस (पागलपन के दौरे) के शिकार इस किशोर का गोरखपुर के मनोचिकित्सक ने एक सप्ताह तक भर्ती कर इलाज किया. बच्चा अब स्वस्थ्य हो रहा है. इलाज जारी है. मनोचिकित्सकों का कहना है कि इन दिनों बच्चों के व्यवहार पर खास ध्यान देने की जरूरत है.

गोपालगंज के व्यापारी परिवार का 14 साल का किशोर नौवीं का छात्र है. परिजनों ने डॉक्टर को बताया कि मार्च के अंतिम हफ्ते में वह सर्दी, जुकाम, गले में दर्द व बुखार से पीड़ित हुआ. कोरोना की चर्चा से उसने अपने लक्षणों का मिलान किया और अचानक एक दिन खुद को कमरे में बंद कर लिया. तीन-चार दिन तक वह अकेला कमरे में रहा. बमुश्किल भोजन-चाय के लिए कमरा खुलवाया जा सका. उसमें भी वह सोशल डिस्टेंस बनाए रहा. परिजन उसे गोरखपुर लेकर आ गए. यहां दाउदपुर स्थित निजी अस्पताल में भर्ती कराया. मनोचिकित्सक डॉ. प्रभात अग्रवाल ने लक्षण देखते ही बीमारी पहचान ली. वह एक्यूट साइकोसिस का मरीज था. उसे एडमिट कर इलाज शुरू किया.

क्या है एक्यूट साइकोसिस: एक्यूट साइकोसिस मानसिक बीमारी का उच्च स्तर है. इसमें मरीज को पागलपन के दौरे पड़ते हैं. इलाज न होने पर वह हिंसक हो जाता है. आत्महत्या या हत्या कर सकता है. समय से इलाज मिलने पर बीमारी ठीक हो सकती है.

व्यवहार में ऐसे बदलाव दिखे तो सतर्क हो जाएं:  

  • एकांत पसंद करने लगना 
  • अचानक गुमसुम हो जाना 
  • खाने में अरुचि हो जाना
  • असामान्य रूप से क्रोधित होना
  • दिनचर्या का अनियमित होना
  • मृत्यु या बीमारी के बारे में लगातार पूछना 
  • खेल में अरुचि हो जाना 
  • पढ़ाई से मन बिलकुल उचाट होना
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