लॉकडाउन में कही शादी की डेट न बढ़ जाये इसलिए बाइक से आया दूल्हा, ब्याहकर ले गया दुल्हन

पटना : शादी की तारीख तय हो गई थी और बीच में कोरोना वायरस आ गया. इसे लेकर लॉकडाउन  वन फिर लॉकडाउन टू, सभी अपने-अपने घरों में रहने को मजबूर थे और इस बीच शादी की तारीख भी नजदीक  आती जा रही थी. दुल्हा-दुल्हन अपनी आनेवाली जिंदगी के हसीन सपने लेकर जल्द-से-जल्द एक-दूसरे के हो जाना चाहते थे. लेकिन लॉकडाउन को लेकर दोनों शादी की तारीख पास आते-आते मायूस हो रहे थे कि शादी कैसे हो? बिना रस्म रिवाज़, बिना सगे संबंधियों की शादी कैसे होगी?

लेकिन दोनों ने तय तारीख को ही शादी का फैसला किया और रीति-रस्मों की दीवारों को तोड़ते हुए और कोरोना बंदी के दौरान लॉकडाउन का पालन करते हुए प्लान बनाया. दूल्हा तय तारीख को अपनी शेरवानी पहन सज संवरकर बाइक से दुल्हन के घर पहुंचा, जहां दुल्हन भी पहले से मेंहदी लगाकर, शादी के जोड़े में तैयार बैठी थी. दोनों ने मास्क पहनकर शादी के रस्मों को निभाया फिर दूल्हा अपनी दुल्हन को बाइक से लेकर अपने घर चला, देखने वालों ने कहा-मियां-बीवी राजी तो क्या करेगा लॉकडाउन।.

दरअसल मुजफ्फरपुर जिले के औराई के भूषण ठाकुर के पुत्र गोविंद और कटरा के विशुनपुर निवासी शैलेन्द्र मिश्रा की बेटी लक्ष्मी की शादी जनवरी में ही तय हो चुकी थी.  दोनों परिवारों ने मिलकर शादी की तारीख 20 अप्रैल तय की थी. शादी की तारिख तय होते ही गोविंद और लक्ष्मी ने मन से एक-दूसरे को पति-पत्नी के रूप में स्वीकार कर लिया था.

दोनों के परिवारवाले भी शादी की तैयारी में लगे थे कि इसी बीच कोरोना वायरस ने दस्तक दी जिसके बाद 25 मार्च को पीएम मोदी ने कोरोना के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए पूरे देश में लॉकडाउन का एेलान कर दिया. 21 दिन बाद फिर से 13 अप्रैल को लॉकडाउन-2 का ऐलान कर दिया गया, जो तीन मई तक रहेगा.

लॉकडाउन के ऐलान के बाद गोविंद और लक्ष्मी परेशान थे कि तय तारीख को शादी कैसे होगी? लेकिन गोविंद ने फैसला लिया कि 20 अप्रैल को हर हाल में शादी तो होगी लेकिन लॉकडाउन के तहत न बैंड बजेगा, न बारात जाएगी और न कोई पार्टी होगी, ना सगे-संबंधी ही होंगे.

जब बिहार में 20 अप्रैल को लॉकडाउन में थोड़ी राहत दी गई तो गोविंद अपने भाई के साथ बाइक पर सवार होकर अपने ससुराल पहुंच और पीछे से गोविंद के पिताजी भूषण ठाकुर अपने दामाद के साथ समधियाने पहुंचे।लड़की के पिता शैलेन्द्र मिश्रा ने भी अपने किसी संबंधी को नहीं बुलाया और बिल्कुल सादे समारोह में पंडित जी ने लॉकडाउन के नियमों का पालन करते हुए दोनो की शादी करवा दी.

शादी कराने वाले ब्राह्मण पंडित जयमंगल झा ने बताया कि ऐसी शादी उन्होंने कभी नही करायी. शादी की अगली सुबह गोविंद बाइक से ही अपनी दुल्हन लक्ष्मी को अपने घर ले आया, जहां ससुराल के परिवार के ही लोगों ने बहू का स्वागत किया. उस दौरान भी किसी तरह की ताम-झाम नहीं की गई। बस बहू आ गई.

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