केंद्रीय ट्रेड यूनियनों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल आज, बैंकिंग, कोयला, पब्लिक सेक्टर और ट्रांसपोर्ट क्षेत्र के कर्मचारी लेंगे हिस्सा

बुधवार को दस केन्द्रीय यूनियनों ने भारत बंद का एलान किया है. इस बंद से आपके कई सारे काम रुक सकते हैं. केंद्र सरकार ने अपने कर्मचारियों से कहा है कि अगर वे आठ जनवरी को हड़ताल में शामिल होते हैं तो उन्हें इसका ‘नतीजा’ भुगतना पड़ेगा. केंद्र सरकार की नीतियों मसलन श्रम सुधार, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश और निजीकरण के खिलाफ केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने बुधवार को राष्ट्रव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है. कार्मिक मंत्रालय की ओर से जारी आदेश में कर्मचारियों को चेतावनी देते हुये हड़ताल से दूर रहने को कहा गया है. इसमें वेतन काटने के अलावा उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है.

दरअसल, सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ ट्रेड यूनियनों ने बंद बुलाया है. दावा है कि इस हड़ताल में 25 करोड़ लोग शामिल होंगे. इस हड़ताल में बैंकिंग, कोयला, तेल, डिफेंस, पब्लिक सेक्टर और ट्रांसपोर्ट क्षेत्र के कर्मचारी हिस्सा लेंगे. वहीं, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने खुद को इस हड़ताल से अलग कर लिया है. बनर्जी ने कहा कि एनआरसी और सीएए के खिलाफ प्रदर्शन में उनका समर्थन रहेगा लेकिन वह भारत बंद से खुद को अलग रखना चाहती हैं.

इस बीच सेंट्रल ट्रेड यूनियन ने बुधवार को हड़ताल की वजह से मेडिकल और इंजीनियरिंग की प्रवेश परीक्षाओं को जनवरी के दूसरे सप्ताह में टालने का आग्रह किया है. मालूम हो कि ट्रेड यूनियन ने सितंबर में ही सरकार विरोधी नीतियों के खिलाफ जनवरी 8 और 9 को हड़ताल करने को लेकर प्लानिंग कर ली थी.

बता दें कि दस केन्द्रीय यूनियनों ने एक बयान में कहा कि श्रम मंत्रालय श्रमिकों की किसी भी मांग पर आश्वासन देने में विफल रहा है, इसे लेकर 2 जनवरी, 2020 को बैठक में पूरा करने की बात कही गई थी. उनका कहना है कि सरकार का रवैया श्रमिकों के प्रति सही नहीं है. बता दें कि यूनियन कर्मचारियों की विभिन्न मांगेंं हैं जिनमें मिनिमम वेज को 21 हजार रुपये करने की मांग की गई है, सभी के लिए उच्च बेसिक पेंशन, श्रम सुधार पर त्रिपक्षीय चर्चा और लाभकारी सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के निजीकरण पर सरकार के फैसलों को वापस लेना शामिल है.

बंद में छात्रों के 60 संगठनों के अलावा कुछ यूनिवर्सिटी का भी साथ है, ये सभी संगठन शिक्षा के व्यवसायीकरण और फीस बढ़ोतरी के मुद्दे को लेकर बंद में शामिल होंगे. बता दें कि ट्रेड यूनियन ने जेएनयू हिंसा को गलत ठहराया है.

बंद में किसका साथ

बुधवार को होने वाले भारत बंद में भारतीय व्यापार संघ ऑल इंडिया यूनाइटेड ट्रेड यूनियन सेंटर, हिंद मजदूर सभा (एचएमएस), स्व-रोजगार महिला संघ, ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (एआईटीयूसी), लेबर प्रोग्रेसिव फेडरेशन शामिल हैं। इसके अलावा (LPF), यूनाइटेड ट्रेड यूनियन कांग्रेस (UTUC), ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ़ ट्रेड यूनियंस (AICCTU), इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस (INTUC) और ट्रेड यूनियन कोऑर्डिनेशन सेंटर ने समर्थन दिया है.

 

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